1 IEV मेरे साथी विश्वासियों, क्योंकि परमेश्वर ने अनेक प्रकार से तुम्हारे प्रति कृपा व्यक्त की है, मैं तुम सब लोगों से निवेदन करता हूँ कि तुम अपने आपको एक बलिदान के रूप में चढ़ाओ, एक ऐसा बलिदान जो जीवित है, जो तुम स्वयं परमेश्वर को देते हो और जो उन्हें प्रसन्न करे। उनकी आराधना करने की यही एकमात्र उचित विधि है। BSB BSB: Therefore I urge you, brothers, on account of God’s mercy, to offer your bodies as living sacrifices, holy and pleasing to God, which is your spiritual service of worship.
2 IEV तुम अपने व्यवहार में अविश्वासियों को मार्गदर्शन नहीं करने देना। इसकी अपेक्षा, परमेश्वर को तुम्हारे सोचने की रीति को बदल कर नया बनाने दो, जिससे कि तुम जान सको कि वह क्या चाहते हैं, और तुम जान सको कि उन्हें प्रसन्न करने के लिए कैसे कार्य करने चाहिए, जैसे वह स्वयं करते हैं। BSB BSB: Do not be conformed to this world, but be transformed by the renewing of your mind. Then you will be able to test and approve what is the good, pleasing, and perfect will of God.
3 IEV क्योंकि परमेश्वर ने दया करके मुझे अपना प्रेरित होने के लिए नियुक्त किया है, जिसके लिए मैं योग्य नहीं था, मैं तुम में से हर एक से यह कहता हूँ: मत सोचो कि तुम जो हो उससे अधिक उत्तम हो। इसकी अपेक्षा, अपने विषय में समझदारी से सोचो, वैसे ही जैसे परमेश्वर ने तुम्हें उन पर भरोसा करने की अनुमति दी है। BSB BSB: For by the grace given me I say to every one of you: Do not think of yourself more highly than you ought, but think of yourself with sober judgment, according to the measure of faith God has given you.
4 IEV यद्यपि एक मनुष्य के शरीर में कई अंग होते हैं। सब अंग शरीर के लिए आवश्यक हैं, परन्तु वे सब एक ही प्रकार से कार्य नहीं करते हैं। BSB BSB: Just as each of us has one body with many members, and not all members have the same function,
5 IEV इसी प्रकार, यद्यपि हम बहुत से हैं, हम सब एक समूह में एकजुट हैं क्योंकि हम मसीह से जुड़े हुए हैं, और हम एक दूसरे के हैं। इसलिए किसी को भी ऐसा व्यवहार नहीं करना चाहिए की जैसे वह दूसरों की तुलना में अधिक महत्वपूर्ण है! BSB BSB: so in Christ we who are many are one body, and each member belongs to one another.
6 IEV इसकी अपेक्षा, कि हम में से हर एक अलग- अलग कार्य कर सकते हैं क्योंकि परमेश्वर ने हमें एक- दूसरे से अलग बनाया है, इसलिए हमें उन अलग- अलग कार्यों को उत्सुकता और उत्साह से करना चाहिए! हम में से जिनको परमेश्वर ने दूसरों के लिए सन्देश दिया है, उन्हें परमेश्वर पर हमारे भरोसे के अनुसार बोलना चाहिए। BSB BSB: We have different gifts according to the grace given us. If one’s gift is prophecy, let him use it in proportion to his faith;
7 IEV जिन्हें परमेश्वर ने दूसरों की सेवा करने में सक्षम बनाया है, उन्हें ऐसा ही करना चाहिए। जिन लोगों को परमेश्वर ने अपनी सच्चाई को सिखाने में सक्षम बनाया है, उन्हें ऐसा ही करना चाहिए। BSB BSB: if it is serving, let him serve; if it is teaching, let him teach;
8 IEV जिन्हें परमेश्वर ने दूसरों को प्रोत्साहित करने के लिए सक्षम किया है, उन्हें पूरे मन से ऐसा करना चाहिए। जिन लोगों को परमेश्वर ने दूसरों को दान दे कर सहायता करने में सक्षम बनाया है, उन्हें बिना संकोच ऐसा करना चाहिए। जिन लोगों को परमेश्वर ने प्रबन्ध करने में सक्षम बनाया है, उन्हें सहर्ष ऐसा करना चाहिए, वरन् सावधानीपूर्वक करना चाहिए। जिन लोगों को परमेश्वर ने आवश्यकता में पड़े लोगों की सहायता करने में सक्षम बनाया है, उन्हें सहर्ष ऐसा करना चाहिए। BSB BSB: if it is encouraging, let him encourage; if it is giving, let him give generously; if it is leading, let him lead with diligence; if it is showing mercy, let him do it cheerfully.
9 IEV तुम लोगों को पूरे सच्चे हृदय से दूसरों से प्रेम करना चाहिए! बुराई से घृणा करो! परमेश्वर जिन बातों को भला समझते हैं उन्हें करते रहो! BSB BSB: Love must be sincere. Detest what is evil; cling to what is good.
10 IEV एक दूसरे को एक ही परिवार के सदस्य के समान प्रेम करो; और एक- दूसरे का सम्मान करने के सम्बन्ध में, तुमको सबसे आगे होना चाहिए! BSB BSB: Be devoted to one another in brotherly love. Outdo yourselves in honoring one another.
11 IEV आलसी मत बनो, इसकी अपेक्षा, परमेश्वर की सेवा करने के लिए उत्सुक बनो! तुम परमेश्वर की सेवा करने के लिए उत्साहित रहो! BSB BSB: Do not let your zeal subside; keep your spiritual fervor, serving the Lord.
12 IEV आनन्द करो क्योंकि तुम विश्वास से उन वस्तुओं की प्रतीक्षा कर रहे हो जो परमेश्वर तुम्हारे लिए करेंगे! जब तुम कष्ट में पड़ो, तो धीरज रखो! प्रार्थना करते रहो और कभी हार न मानों! BSB BSB: Be joyful in hope, patient in affliction, persistent in prayer.
13 IEV यदि परमेश्वर के किसी भी जन को कमी है, तो तुम्हारे पास जो है वह उसके साथ साझा करो! दूसरों का अतिथि- सत्कार करने में लगे रहो! BSB BSB: Share with the saints who are in need. Practice hospitality.
15 IEV यदि वे आनन्दित होते हैं, तो तुम्हें उनके साथ आनन्द करना चाहिए! यदि वे उदास हैं, तो तुम्हें उनके साथ दुखी होना चाहिए! BSB BSB: Rejoice with those who rejoice; weep with those who weep.
16 IEV दूसरों के लिए ऐसी इच्छा रखो जैसी तुम स्वयं के लिए रखते हो। अपनी सोच में घमण्डी मत बनो; इसकी अपेक्षा, महत्वहीन मनुष्यों के मित्र बनो। अपने आपको बुद्धिमान मत समझो। BSB BSB: Live in harmony with one another. Do not be proud, but associate with the lowly. Do not be conceited.
18 IEV अन्य लोगों के साथ जब तक संभव हो शान्तिपूर्वक रहो, जब तक कि तुम्हारे वश में है। BSB BSB: If it is possible on your part, live at peace with everyone.
20 IEV जो लोग तुम्हारे साथ बुरा करते हैं, उनके साथ बुराई करने की अपेक्षा, पवित्रशास्त्र के अनुसार करो:“यदि तुम्हारे शत्रु भूखे हों, तो उन्हें खाना दो! यदि वे प्यासे हों, तो उन्हें कुछ पीने के लिए दो। तुम्हारे ऐसा करने से उन्हें लज्जा की पीड़ा का आभास होगा और संभव है कि वे तुम्हारे प्रति अपना व्यवहार बदल लें।” BSB BSB: On the contrary, “If your enemy is hungry, feed him; if he is thirsty, give him a drink. For in so doing, you will heap burning coals on his head.”
21 IEV बुरे कर्मों को जो दूसरों ने तुम्हारे साथ किए हैं, उन्हें स्वयं पर प्रभावित होने न दो। इसकी अपेक्षा, उन्होंने जो तुम्हारे साथ किया है उससे अच्छा उनके साथ करो! BSB BSB: Do not be overcome by evil, but overcome evil with good.
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