2 IEV नम्रतापूर्वक और कोमलता तथा धीरज से एक दूसरे की ज़रूरतों को पूरा करते रहो क्योंकि तुम एक- दूसरे से प्रेम करते हो। BSB BSB: with all humility and gentleness, with patience, bearing with one another in love,
5 IEV केवल एक ही प्रभु हैं, जो यीशु मसीह हैं, और एक विश्वास है, जो परमेश्वर पर हमारा भरोसा है; और केवल एक ही सच्चा मसीही बपतिस्मा है। BSB BSB: one Lord, one faith, one baptism;
6 IEV एक परमेश्वर हैं, जो सभी के सच्चे पिता हैं। वे हर किसी पर राज्य करते हैं, और वे सभी घटनाओं के द्वारा काम कर रहे हैं, और जो कुछ होता है, उसके अन्दर वे काम कर रहे हैं। BSB BSB: one God and Father of all, who is over all and through all and in all.
7 IEV परमेश्वर ने प्रत्येक विश्वासी को आत्मिक आशीषें उदारता से दी हैं जिन्हें मसीह ने अपनी इच्छा के अनुसार हमें भरपूरी से दी हैं। BSB BSB: Now to each one of us grace has been given according to the measure of the gift of Christ.
8 IEV यह उसके समान है जो भजनकार ने परमेश्वर के विषय में कहा कि परमेश्वर उन लोगों से भेंट का धन लेते हैं जिन पर उन्होंने विजय प्राप्त की है, जब वे पहाड़ की चोटी पर अपने शहर में चढ़ गए, वे कैदियों को कैद में ले गए और उनकी अर्पित भेंटों को अपने लोगों को दे दिया। BSB BSB: This is why it says: “When He ascended on high, He led captives away, and gave gifts to men.”
9 IEV " वे चढ़ गए" शब्द निश्चित रूप से हमें बताता है कि मसीह पहले भी स्वर्ग से पृथ्वी पर उतर आए थे, जैसे परमेश्वर के अभिषिक्त राजा यरूशलेम से युद्ध करने के लिए उतरता था। BSB BSB: What does “He ascended” mean, except that He also descended to the lower parts of the earth?
10 IEV मसीह, जो बुराई पर विजय पाने के लिए पृथ्वी पर उतर आए, वही जिन्हें हमारे पापों के लिए क्रूस पर चढ़ाया गया था, फिर से जीवित हुआ और स्वर्ग में सबसे ऊंचे स्थान पर चढ़ गए, ताकि वे सब कुछ नियंत्रित कर सकें। BSB BSB: He who descended is the very One who ascended above all the heavens, in order to fill all things.
11 IEV उन्होंने कुछ विश्वासियों को प्रेरित, कुछ को भविष्यद्वक्ता, कुछ प्रचारक होने, और कुछ लोगों को नेतृत्व करने और दूसरों को विश्वासियों के समूह को सिखाने के लिए नियुक्त किया। BSB BSB: And it was He who gave some to be apostles, some to be prophets, some to be evangelists, and some to be pastors and teachers,
12 IEV यह परमेश्वर के लोगों को परमेश्वर का काम करने और दूसरों की सेवा करने को तैयार करने के लिए था, ताकि मसीह के सभी लोग आत्मिक रूप से मजबूत हो सकें BSB BSB: to equip the saints for works of ministry and to build up the body of Christ,
13 IEV वे चाहते हैं कि हम सभी विश्वासी एकजुट हो जाएँ क्योंकि हम सभी उन पर भरोसा करते हैं और उन्हें पूरी तरह समझने में बढ़ते जाते हैं। वे चाहते हैं कि हम परिपक्व विश्वासी बनें, एक साथ मिलकर सिद्ध होने की ओर बढ़ते जाएँ जैसे वे स्वयं सिद्ध हैं। BSB BSB: until we all reach unity in the faith and in the knowledge of the Son of God, as we mature to the full measure of the stature of Christ.
14 IEV जब हम परिपक्व हो जाएँगे तब हम छोटे बच्चों की तरह सच से अनजान नहीं रहेंगे। हम तब हर नई शिक्षा का पालन नहीं करेंगे, जैसे हवा और लहरों के बीच एक नाव हिलती- डुलती है। जो लोग झूठी शिक्षा देते हैं, उन्हें हम धोखा देने और बहकाने नहीं देंगे। BSB BSB: Then we will no longer be infants, tossed about by the waves and carried around by every wind of teaching and by the clever cunning of men in their deceitful scheming.
15 IEV इसके बजाय, हम परमेश्वर से प्रेम करते और उनकी सच्ची शिक्षाओं पर भरोसा करते रहेंगे, और हम हर तरह से मसीह की समानता में अधिक बदलते जाएँगे। वे अपने लोगों पर ऐसे नियंत्रण करते हैं जैसे किसी व्यक्ति का सिर उसके शरीर पर नियंत्रण करता है। BSB BSB: Instead, speaking the truth in love, we will in all things grow up into Christ Himself, who is the head.
16 IEV वह सभी विश्वासियों को एक साथ बढ़ने और एक- दूसरे से प्रेम करने के लिए सक्षम बनाते हैं, जैसे एक व्यक्ति के शरीर के अंग एक- दुसरे के साथ जुड़े रहते हैं और जोड़ों की सहायता से पूरा शरीर एक साथ बंधा रहता है, जिससे शरीर को बढ़ने और खुद को पुष्ट रखने की क्षमता मिलती है, क्योंकि शरीर के अंग एक दूसरे पर निर्भर रहते हैं। BSB BSB: From Him the whole body, fitted and held together by every supporting ligament, grows and builds itself up in love through the work of each individual part.
17 IEV प्रभु यीशु के अधिकार के द्वारा, मैं दृढ़ता के साथ कहता हूँ कि तुम अब अविश्वासी गैर- यहूदियों की तरह न रहना। उनके मन के तुच्छ विचार उन्हें निर्देशित करते हैं कि कैसे जीवन बिताना है। BSB BSB: So I tell you this, and insist on it in the Lord, that you must no longer walk as the Gentiles do, in the futility of their thinking.
18 IEV वे सही या गलत के बारे में स्पष्ट रूप से सोचने में असमर्थ हैं। वे परमेश्वर की आज्ञा पालन को समझ नहीं सकते क्योंकि वे उनके संदेश को सुनने से इन्कार करते हैं, और इसलिए उनके पास अनन्त जीवन नहीं है जो यीशु हमें देते हैं। BSB BSB: They are darkened in their understanding and alienated from the life of God because of the ignorance that is in them due to the hardness of their hearts.
19 IEV उन्होंने बिना रुके उन शर्मनाक कार्यों को चुना, जो उनके शरीर की इच्छा के अनुसार था। वे सभी प्रकार के अनैतिक कार्य करते हैं और उन्हें अधिक से अधिक करने को उत्सुक रहते हैं, और वे हर उस वस्तु का लालच करते हैं जिसे वे पाना चाहते हैं। BSB BSB: Having lost all sense of shame, they have given themselves over to sensuality for the practice of every kind of impurity, with a craving for more.
20 IEV लेकिन जब तुमने मसीह के बारे में सीखा, तो तुमने ऐसी चाल चलना नहीं सीखा था। BSB BSB: But this is not the way you came to know Christ.
21 IEV अब जब कि तुमने यीशु के बारे में सुना है और उन्होंने तुम्हें सिखाया है, तो तुम जानते हो कि उनका मार्ग जीवन जीने का सच्चा मार्ग हैं। BSB BSB: Surely you heard of Him and were taught in Him—in keeping with the truth that is in Jesus—
22 IEV यीशु ने सिखाया था कि तुम जिस तरह जीवन जीते थे उसे रोकना होगा। तुम ऐसी लाशों की तरह थे जो सड़ रही थी, क्योंकि तुम अपनी अभिलाषाओं के कारण अपने आप को धोखा दे रहे थे। BSB BSB: to put off your former way of life, your old self, which is being corrupted by its deceitful desires;
23 IEV परमेश्वर को तुम्हारी आत्माओं और विचारों को बदलने की अनुमति दो। BSB BSB: to be renewed in the spirit of your minds;
24 IEV तुम्हें नए व्यक्तित्व की तरह रहना शुरू करना चाहिए। परमेश्वर ने तुम्हें नया व्यक्तित्व दिया है। तुम उनके लिए अलग किए गए हो। उन्होंने तुम्हें सही तरीके से जीने के लिए बनाया है, जो वास्तव में परमेश्वर के लिए समर्पित है। BSB BSB: and to put on the new self, created to be like God in true righteousness and holiness.
25 IEV इसलिए, एक दूसरे से झूठ बोलना छोड़ दो जैसा कि पवित्र शास्त्र कहता है," एक- दूसरे से सच्चाई से बोलो क्योंकि अब हम आपस में साथी विश्वासी हैं।" अब परमेश्वर के परिवार में हम एक दूसरे के हैं। BSB BSB: Therefore each of you must put off falsehood and speak truthfully to his neighbor, for we are all members of one another.
26 IEV यदि तुम क्रोधित हो जाते हो तो अपने क्रोध को पाप न बनने दो। दिन की समाप्ति से पहले, गुस्सा छोड़ दो BSB BSB: “Be angry, yet do not sin.” Do not let the sun set upon your anger,
27 IEV ताकि तुम शैतान को अपने ऊपर हमले करने का अवसर न दे सको। BSB BSB: and do not give the devil a foothold.
28 IEV जो लोग चोरी करते थे, उन्हें अब चोरी नहीं करनी चाहिए। इसके बजाय, उन्हें स्वयं परिश्रम से रोज़ी- रोटी कमाने के लिए कड़ी मेहनत करनी चाहिए, जिससे जरूरतमंद लोगों को देने के लिए उनके पास कुछ हो। BSB BSB: He who has been stealing must steal no longer, but must work, doing good with his own hands, that he may have something to share with the one in need.
29 IEV गलत भाषा का उपयोग न करें। इसके बजाय, अच्छी बातें बोलो, ऐसी बातें जिससे सुनने वालों को उनके जरूरत के समय सहायता मिले। BSB BSB: Let no unwholesome talk come out of your mouths, but only what is helpful for building up the one in need and bringing grace to those who listen.
30 IEV परमेश्वर का पवित्र आत्मा को अपने जीवनशैली के द्वारा दुखी न करो। उन्होंने वादा किया हैं कि परमेश्वर एक दिन हमें इस दुष्ट संसार से बचाएंगे। BSB BSB: And do not grieve the Holy Spirit of God, in whom you were sealed for the day of redemption.
31 IEV दूसरों के प्रति द्वेष न रखो। किसी भी तरह क्रोधित न होना और न अपमानजनक रीति से दूसरों पर चिल्लाना। कभी दूसरों की निंदा न करना और कभी भी दूसरों के प्रति बुराई की योजना न बनाना। BSB BSB: Get rid of all bitterness, rage and anger, outcry and slander, along with every form of malice.
32 IEV एक दूसरे पर कृपा करो। एक दूसरे के प्रति दयालु बनो। एक दूसरे को क्षमा करो, जैसे परमेश्वर ने भी तुम्हें मसीह के द्वारा किए गए कार्य के कारण क्षमा किया है। BSB BSB: Be kind and tenderhearted to one another, forgiving each other just as in Christ God forgave you.
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