2 HGST यह पहली बार था जब रोमियों ने उनके साम्राज्य में रहने वाले हर एक जन के नामों का संकलन किया था। यह उन्होंने उस समय के दौरान किया था जब क्विरिनियुस सीरिया प्रान्त का राज्यपाल था। BSB BSB: This was the first census to take place while Quirinius was governor of Syria.
3 HGST इसलिए हर एक जन को पंजीकरण करवाने के लिए अपने घराने के गृहनगर में जाना ही था। BSB BSB: And everyone went to his own town to register.
5 HGST जब वे बैतलहम पहुँचे, तो जहाँ पर सामान्यतः आगंतुक ठहरा करते थे उस स्थान में उनके ठहरने के लिए कोई जगह उपलब्ध नहीं थी। इसलिए उनको एक ऐसे स्थान में ठहरना पड़ा जहाँ पर रात में पशु सोया करते थे। जिस समय पर वे वहाँ थे तभी मरियम का जन्म देने का समय आ गया और उसने अपनी प्रथम सन्तान, एक पुत्र को जन्म दिया। उसने उसे कपड़े की चौड़ी लीरों में लपेटकर वहाँ पर लिटा दिया जहाँ पर खलिहान के अंदर पशुओं के लिए चारा रखा जाता था। BSB BSB: He went there to register with Mary, who was pledged to him in marriage and was expecting a child.
7 HGST उस रात कुछ चरवाहे बैतलहम के पास खुले मैदान में डेरा डाले हुए थे। वे वहाँ पर अपनी भेड़ों की देखभाल कर रहे थे। BSB BSB: And she gave birth to her firstborn, a Son. She wrapped Him in swaddling cloths and laid Him in a manger, because there was no room for them in the inn.
9 HGST अचानक से उन्होंने प्रभु की ओर से आए हुए एक स्वर्गदूत को अपने सामने खड़े हुए देखा। प्रभु की ओर से एक अनुग्रहकारी प्रकाश उनके चारों ओर चमक उठा। वे अत्यन्त भयभीत हो गए। BSB BSB: Just then an angel of the Lord stood before them, and the glory of the Lord shone around them, and they were terrified.
10 HGST परन्तु स्वर्गदूत ने उनसे कहा,“भयभीत न हो! ध्यानपूर्वक सुनो, क्योंकि मैं तुम को बड़ा शुभ सन्देश बताने के लिए आया हूँ! यह सन्देश सभी लोगों के लिए है, और हर एक को आनन्दित होना चाहिए! BSB BSB: But the angel said to them, “Do not be afraid! For behold, I bring you good news of great joy that will be for all the people:
11 HGST वे आनन्दित होंगे क्योंकि आज, राजा दाऊद के गृहनगर, बैतलहम में, वह व्यक्ति उत्पन्न हुआ है जो तुम को{ तुम्हारे पापों से} बचाएगा! वही मसीह, प्रभु है! BSB BSB: Today in the city of David a Savior has been born to you. He is Christ the Lord!
12 HGST और वहाँ तुम्हारे लिए एक चिन्ह है।{ यदि तुम बैतलहम जाओ,} तो वहाँ तुम एक शिशु को कपड़े की पट्टियों में लिपटा हुआ और पशुओं के चारा खाने के स्थान में लेटा हुआ पाओगे।” BSB BSB: And this will be a sign to you: You will find a baby wrapped in swaddling cloths and lying in a manger.”
13 HGST अचानक से स्वर्गदूतों का एक विशाल समूह दूसरे स्वर्गदूत के साथ स्वर्ग से प्रकट हुआ। वे सब के सब यह कहते हुए परमेश्वर की स्तुति कर रहे थे, BSB BSB: And suddenly there appeared with the angel a great multitude of the heavenly host, praising God and saying:
14 HGST “सारे स्वर्गदूत सबसे ऊँचे स्वर्ग पर परमेश्वर की स्तुति करो! और पृथ्वी पर उन सारे लोगों में{ परमेश्वर के और एक दूसरे के साथ} शान्ति स्थापित हो जो परमेश्वर को प्रसन्न करते हैं!” BSB BSB: “Glory to God in the highest, and on earth peace to men on whom His favor rests!”
15 HGST जब स्वर्गदूत उनको छोड़कर और स्वर्ग को लौट गए, तो चरवाहों ने एक दूसरे से कहा,“हमें इसी समय बैतलहम को जाना चाहिए और इस आश्चर्यजनक बात को देखना चाहिए जो घटित हुई है, जिसके विषय में प्रभु ने हम को बताया है!” BSB BSB: When the angels had left them and gone into heaven, the shepherds said to one another, “Let us go to Bethlehem and see this thing that has happened, which the Lord has made known to us.”
16 HGST अतः वे शीघ्रता से गए, और जब उनको{ वह स्थान जहाँ} मरियम और यूसुफ{ ठहरे हुए थे} मिल गया, तो उन्होंने शिशु को पशुओं के चारा खाने के स्थान में लेटा हुआ देखा। BSB BSB: So they hurried off and found Mary and Joseph and the Baby, who was lying in the manger.
17 HGST उसको देख लेने के पश्चात, जो परमेश्वर ने उस शिशु के विषय में उन पर प्रकट किया था उन्होंने सब को बता दिया। BSB BSB: After they had seen the Child, they spread the message they had received about Him.
18 HGST सभी लोग जो सुन रहे थे सोचने लगे कि जो चरवाहों ने उन्हें बताया वह अद्भुत था। BSB BSB: And all who heard it were amazed at what the shepherds said to them.
19 HGST परन्तु मरियम ने इन सब बातों को ध्यानपूर्वक स्मरण किया और उनके विषय में लगातार विचार करती रही। BSB BSB: But Mary treasured up all these things and pondered them in her heart.
20 HGST वे चरवाहे{ जहाँ पर उनकी भेड़ें थीं उन मैदानों को} लौट गए। वे इस विषय में बातें करते रहे कि परमेश्वर कितना महान है और उन सब बातों के लिए उसकी स्तुति करते रहे जो उन्होंने सुनीं और देखी थीं। सारी बातें ठीक उसी प्रकार से हुईं जैसे कि उस स्वर्गदूत ने उनके होने के लिए बताया था। BSB BSB: The shepherds returned, glorifying and praising God for all they had heard and seen, which was just as the angel had told them.
22 HGST मरियम और यूसुफ ने उतने दिनों तक प्रतीक्षा की जितने संस्कारिक रीति से शिशु को जन्म देने के उपरान्त उसके फिर से शुद्ध होने के लिए मूसा की व्यवस्था में आवश्यक थे। फिर वे उसे लेकर यरूशलेम को आए ताकि वे उसे प्रभु के लिए{ मंदिर में} समर्पित करें। BSB BSB: And when the time of purification according to the Law of Moses was complete, His parents brought Him to Jerusalem to present Him to the Lord
23 HGST उन्होंने यह प्रभु की व्यवस्था का आज्ञापालन करने के लिये किया, जो कहता है, कि जितने पहिलौठे नर संतान उत्पन्न हों, तू उन सभी को प्रभु के लिए पृथक करना।" BSB BSB: (as it is written in the Law of the Lord: “Every firstborn male shall be consecrated to the Lord”),
24 HGST वहाँ उन्होंने बलिदान चढ़ाया जिसे नए जन्मे पुत्र के माता- पिता को चढ़ाने के लिए प्रभु की व्यवस्था कहती है,“दो पण्डुक, या कबूतर के दो बच्चे।” BSB BSB: and to offer the sacrifice specified in the Law of the Lord: “A pair of turtledoves or two young pigeons.”
25 HGST उस समय पर वहां यरूशलेम में एक व्यक्ति था जिसका नाम शमौन था। वह वही करता था जिससे परमेश्वर प्रसन्न होता था और परमेश्वर की व्यवस्था का पालन किया करता था। वह इस्राएल के लोगों को प्रोत्साहित करने हेतु परमेश्वर द्वारा मसीह को भेजने की उत्सुकतापूर्वक प्रतीक्षा कर रहा था। पवित्र आत्मा उसे निर्देशित कर रहा था। BSB BSB: Now there was a man in Jerusalem named Simeon, who was righteous and devout. He was waiting for the consolation of Israel, and the Holy Spirit was upon him.
26 HGST पवित्र आत्मा ने पहले से ही उस पर यह प्रकट किया हुआ था कि उसके मरने से पूर्व, प्रभु अपने मसीह को भेजेगा और वह उसे देखने पाएगा। BSB BSB: The Holy Spirit had revealed to him that he would not see death before he had seen the Lord’s Christ.
27 HGST अतः पवित्र आत्मा ने शमौन की मंदिर के आँगन में जाने के लिए अगुवाई की। उस समय पर वह वहीं पर उपस्थित था जब यूसुफ और मरियम शिशु यीशु को लेकर आए ताकि वे उसके लिए उस संस्कार को कर सकें जिसकी आज्ञा परमेश्वर ने व्यवस्था में दी हुई है। BSB BSB: Led by the Spirit, he went into the temple courts. And when the parents brought in the child Jesus to do for Him what was customary under the Law,
28 HGST { जब शमौन ने यीशु को देखा तो,} उसने उसे अपनी गोद में उठाया और परमेश्वर का धन्यवाद दिया, और फिर उसने कहा, BSB BSB: Simeon took Him in his arms and blessed God, saying:
29 HGST “हे प्रभु, तूने मेरे साथ किए हुए अपने वायदे को पूरा किया है, और अब मैं तुझ से संतुष्ट हूँ कि मुझे मरने दे। BSB BSB: “Sovereign Lord, as You have promised, You now dismiss Your servant in peace.
30 HGST क्योंकि मैंने उस जन को देख लिया है जिसे तूने लोगों को बचाने के लिए भेजा है, BSB BSB: For my eyes have seen Your salvation,
31 HGST वह जन जिसे तू ने सब लोगों के देखने के लिए तैयार किया है। BSB BSB: which You have prepared in the sight of all people,
32 HGST वह एक ऐसे उजियाले के समान होगा जो तेरे सत्य को दूसरी जातियों पर उजागर करेगा। वह यह प्रकट करेगा कि तेरी प्रजा, इस्राएल के लिए तेरी योजना कितनी महिमामय है।” BSB BSB: a light for revelation to the Gentiles, and for glory to Your people Israel.”
33 HGST जो बातें शमौन ने यीशु के विषय में कहीं उन पर उसके माता और पिता विस्मित हो गए। BSB BSB: The Child’s father and mother were amazed at what was spoken about Him.
34 HGST फिर शमौन ने उनको आशीषित किया, और यीशु की माता, मरियम से कहा,“जो मैं कहता हूँ उस पर अच्छे से ध्यान देः परमेश्वर ने यह निर्धारित किया है कि, इस बालक के कारण, इस्राएल में रहने वाले बहुत से लोग परमेश्वर को अस्वीकार कर देंगे और बहुत से स्वयं को परमेश्वर के अधीन कर देंगे। वह{ परमेश्वर की ओर से} एक ऐसा चिन्ह ठहरेगा जिसका बहुत से लोग विरोध करेंगे। BSB BSB: Then Simeon blessed them and said to His mother Mary: “Behold, this Child is appointed to cause the rise and fall of many in Israel, and to be a sign that will be spoken against,
35 HGST जहाँ तक तुम्हारी बात है,{ लोग उसके साथ जिन क्रूर कामों को करेंगे वह तुम को इतना दुःखी कर देगा कि} यह ऐसा लगेगा कि जैसे कोई तलवार तुम्हारी अन्तरात्मा को छेद रही है।{ परन्तु यह इसलिए आवश्यक है} ताकि वह बहुत से लोगों के गुप्त विचारों को उजागर कर सके।” BSB BSB: so that the thoughts of many hearts will be revealed—and a sword will pierce your soul as well.”
36 HGST वहाँ{ मंदिर के आँगन में} हन्नाह नाम की एक भविष्यद्वक्तिनी भी उपस्थित थी। वह बहुत वृद्ध थी। वह फनूएल की पुत्री थी, जो आशेर के गोत्र का था। एक युवती के रूप में, वह विवाह में सात वर्ष तक रही थी,{ और फिर उसके पति की मृत्यु हो गई थी}। BSB BSB: There was also a prophetess named Anna, the daughter of Phanuel, of the tribe of Asher, who was well along in years. She had been married for seven years,
37 HGST उसके पश्चात, वह 84 वर्षों से अधिक से विधवा के रूप में रह रही थी। ऐसा लगता था कि जैसे वह सर्वदा मंदिर में ही रहा करती थी, और रात और दिन{ हर समय} उपवास और प्रार्थना करते हुए परमेश्वर की आराधना किया करती थी। BSB BSB: and then was a widow to the age of eighty-four. She never left the temple, but worshiped night and day, fasting and praying.
38 HGST उसी समय पर, हन्नाह{ यूसुफ और मरियम और शिशु के पास} पहुँची। हन्नाह{ उस शिशु के लिए} परमेश्वर का धन्यवाद देने लगी। तत्पश्चात, वह कई अन्य लोगों से यीशु के विषय में बातें करती रही जो साथ ही उस मसीहा की{ परमेश्वर के द्वारा भेजने की} प्रतीक्षा कर रहे थे जो इस्राएल के लोगों को स्वतंत्र करेगा। BSB BSB: Coming forward at that moment, she gave thanks to God and spoke about the Child to all who were waiting for the redemption of Jerusalem.
40 HGST जैसे- जैसे वह बालक बढ़ता गया, वह बलवन्त और अत्यन्त बुद्धिमान होता गया, और परमेश्वर उसके जीवन में उपस्थित था। BSB BSB: And the Child grew and became strong. He was filled with wisdom, and the grace of God was upon Him.
42 HGST अतः जब यीशु 12 वर्ष की आयु का था, तब उन सब ने इकट्ठे होकर यरूशलेम की यात्रा की जब{ फसह के} पर्व का समय था। BSB BSB: And when He was twelve years old, they went up according to the custom of the Feast.
43 HGST जब पर्व को मनाने के दिन समाप्त हो गए, तो यीशु के माता- पिता घर लौटने लगे, परन्तु उनका पुत्र, यीशु, पीछे यरूशलेम में ही रह गया। उसके माता- पिता यह नहीं जानते थे{ कि वह अभी भी वहीं पर था}। BSB BSB: When those days were over and they were returning home, the boy Jesus remained behind in Jerusalem, but His parents were unaware He had stayed.
44 HGST उन्होंने सोचा कि वह उन अन्य लोगों के साथ होगा जो उनके साथ यात्रा कर रहे थे। परन्तु एक दिन चलने के पश्चात, उन्होंने उसे अपने कुटुम्बियों और मित्रों के मध्य में खोजना आरम्भ किया। BSB BSB: Assuming He was in their company, they traveled on for a day before they began to look for Him among their relatives and friends.
45 HGST जब वह उनको नहीं मिला, तो वे उसे ढूँढ़ने के लिए यरूशलेम को लौट गए। BSB BSB: When they could not find Him, they returned to Jerusalem to search for Him.
46 HGST { मरियम और यूसुफ के यरूशलेम से निकल जाने के} तीन दिनों के पश्चात, यीशु उनको मंदिर में मिला। वह यहूदी धार्मिक शिक्षकों के मध्य में बैठा हुआ था। वह उनको शिक्षा देते हुए सुन रहा था और वह उनसे प्रश्न भी पूछ रहा था। BSB BSB: Finally, after three days they found Him in the temple courts, sitting among the teachers, listening to them and asking them questions.
47 HGST सभी लोग जिन्होंने उसकी बातें सुनीं, जो उसने कही थीं वे इस बात से अचम्भित थे कि उसने कितनी अच्छी तरह से समझ लिया और उसने कितनी अच्छी तरह{ शिक्षकों द्वारा पूछे गए प्रश्नों} का उत्तर दिया। BSB BSB: And all who heard Him were astounded at His understanding and His answers.
48 HGST जब उसके माता- पिता ने उसे देखा, तो वे बहुत चकित हुए। उसकी माता ने उससे कहा,“हे मेरे पुत्र, तुझे हमारे साथ ऐसा नहीं करना चाहिए था। मेरे बात सुन! तेरी खोज करते हुए तेरा पिता और मैं बहुत चिन्तित थे!” BSB BSB: When His parents saw Him, they were astonished. “Child, why have You done this to us?” His mother asked. “Your father and I have been anxiously searching for You.”
49 HGST उसने उनसे कहा," मैं अचम्भित हूँ कि तुम्हें मेरी खोज करने की आवश्यकता पड़ी। मैंने सोचा था कि तुम जानते होंगे कि मुझे{ उसके विषय में जानने के लिए} अपने पिता के घर पर रहना आवश्यक है।” BSB BSB: “Why were you looking for Me?” He asked. “Did you not know that I had to be in My Father’s house?”
50 HGST परन्तु जो कुछ उसने उनसे कहा उसका अर्थ वे नहीं समझ पाए। BSB BSB: But they did not understand the statement He was making to them.
52 HGST जैसे- जैसे वर्ष बीतते गए, यीशु समझदार होता गया, और वह कद में भी बढ़ता गया। परमेश्वर और लोग भी उसको अधिकाधिक पसंद करने लगे। BSB BSB: And Jesus grew in wisdom and stature, and in favor with God and man.