1 HGST “जब उस भविष्य के समय में परमेश्वर स्वर्ग से अपना शासन प्रकट करेगा, तो यह वैसा ही होगा जैसा{ इस कहानी में} दस अविवाहित लड़कियों के साथ घटित हुआ था।{ रात के समय} वे अपने तेल के दीपक लेकर{ उस स्थान पर} गईं{ जहाँ वे} दूल्हे से मिलेंगी। BSB BSB: “At that time the kingdom of heaven will be like ten virgins who took their lamps and went out to meet the bridegroom.
2 HGST इन लड़कियों में से पाँच मूर्ख थीं और{ अन्य} पाँच लड़कियाँ समझदार थीं। BSB BSB: Five of them were foolish, and five were wise.
3 HGST मूर्ख लड़कियों ने अपने तेल के दीपक तो लिए, परन्तु{ अपने दीपक जलाए रखने के लिए} अपने साथ कोई{ अतिरिक्त} जैतून का तेल नहीं लिया। BSB BSB: The foolish ones took their lamps but did not take along any extra oil.
4 HGST परन्तु समझदार लड़कियों ने अपने तेल के दीपकों के साथ अपने बर्तनों में{ अतिरिक्त} जैतून का तेल भी ले लिया। BSB BSB: But the wise ones took oil in flasks along with their lamps.
5 HGST दूल्हे ने आने में देर कर दी{, और रात बहुत हो गई थी}। अत: सब लड़कियों को नींद आने लगी और फिर वे सो गईं। BSB BSB: When the bridegroom was delayed, they all became drowsy and fell asleep.
6 HGST लगभग आधी रात में किसी ने पुकारा,‘ध्यान दो! दूल्हा{ आ रहा है}! उससे मिलने के लिए बाहर जाओ!’ BSB BSB: At midnight the cry rang out: ‘Here is the bridegroom! Come out to meet him!’
7 HGST उस समय सब लड़कियाँ जाग गईं और उन्होंने अपने तेल के दीपक ठीक से जलने के लिए व्यवस्थित किए। BSB BSB: Then all the virgins woke up and trimmed their lamps.
8 HGST मूर्ख लड़कियों ने समझदार लड़कियों से कहा,‘हमें अपने जैतून के तेल में से कुछ दो, क्योंकि हमारे तेल के दीपकों{ की आग} बुझने वाली है!’ BSB BSB: The foolish ones said to the wise, ‘Give us some of your oil; our lamps are going out.’
9 HGST समझदार लड़कियों ने उत्तर दिया,‘{ नहीं, क्योंकि} हमारे और तुम्हारे दीपकों के लिए निश्चय ही जैतून का तेल पर्याप्त नहीं होगा। बेचने वालों के पास जाकर अपने लिए थोृड़ा जैतून का तेल खरीद लो!’ BSB BSB: ‘No,’ said the wise ones, ‘or there may not be enough for both us and you. Instead, go to those who sell oil and buy some for yourselves.’
10 HGST परन्तु जब मूर्ख लड़कियाँ जैतून का तेल खरीदने अपने मार्ग पर जा रही थीं, तो दूल्हा आ पहुँचा। तब समझदार लड़कियाँ, जो तैयार थीं, उसके साथ विवाह के उत्सव में भीतर चली गईं। तब किसी ने{ उस स्थान का} द्वार बंद कर दिया। BSB BSB: But while they were on their way to buy it, the bridegroom arrived. Those who were ready went in with him to the wedding banquet, and the door was shut.
11 HGST बाद में, बाकी लड़कियाँ भी{ उस स्थान पर} आ पहुँचीं। उन्होंने{ दूल्हे को} पुकारा,‘हे स्वामी! कृपा करके हमारे लिए द्वार खोल!’ BSB BSB: Later the other virgins arrived and said, ‘Lord, lord, open the door for us!’
12 HGST परन्तु उसने उनसे कहा,‘मैं तुम से सच कहता हूँ कि मैं तुम्हें नहीं जानता{, अत: मैं तुम्हारे लिए द्वार नहीं खोलूँगा}!’ BSB BSB: But he replied, ‘Truly I tell you, I do not know you.’
13 HGST अत:,{ तुम्हारे साथ ऐसा न हो इसलिए,} तैयार रहो क्योंकि तुम ठीक- ठीक नहीं जानते कि मैं कब{ वापस आऊँगा}।” BSB BSB: Therefore keep watch, because you do not know the day or the hour.
14 HGST “{ तुम्हें तैयार रहना चाहिए} क्योंकि जब परमेश्वर स्वर्ग से अपना शासन प्रकट करेगा, तो यह उस मनुष्य के समान होगा जो किसी दूसरे देश में{ एक लम्बी यात्रा} पर जाने वाला था। उसने अपने सेवकों को एक साथ बुलाया और जो कुछ उसके पास था उसमें से कुछ उन्हें सौंप दिया। BSB BSB: For it is just like a man going on a journey, who called his servants and entrusted them with his possessions.
15 HGST उसने उनमें से प्रत्येक को उनकी उपयोग करने की योग्यता के अनुसार धन दिया। उसने एक सेवक को 30, 000 दिनों की मजदूरी के बराबर धन दिया। उसने दूसरे सेवक को 12, 000 दिनों की मजदूरी के बराबर धन दिया, और उसने तीसरे सेवक को 6, 000 दिनों की मजदूरी के बराबर धन दिया। फिर वह तुरन्त दूसरे देश की अपनी यात्रा पर चला गया। BSB BSB: To one he gave five talents, to another two talents, and to another one talent—each according to his own ability. And he went on his journey.
16 HGST उसके चले जाने के बाद, जिस सेवक को 30, 000 दिनों की मजदूरी के बराबर धन मिला था, उसने उस धन का उपयोग 30, 000 दिनों की और मजदूरी कमाने के लिए किया। BSB BSB: The servant who had received the five talents went at once and put them to work and gained five more.
17 HGST इसी रीति से, जिस सेवक को 12, 000 दिनों की मजदूरी के बराबर धन मिला था, उसने{ उस धन का उपयोग} 12, 000 दिनों की और मजदूरी कमाने के लिए किया। BSB BSB: Likewise, the one with the two talents gained two more.
18 HGST परन्तु जिस सेवक को 6, 000 दिनों की मजदूरी के बराबर धन मिला था, उसने जाकर{ उसे सुरक्षित रखने के लिए} भूमि में एक गड्ढा खोदकर उसे वहाँ छिपा दिया। BSB BSB: But the servant who had received the one talent went off, dug a hole in the ground, and hid his master’s money.
19 HGST लम्बे समय के बाद उन सेवकों का स्वामी लौट आया। उसने यह पता लगाने के लिए कि उन्होंने उसके धन के साथ क्या किया था उन सब को एक साथ बुलाया। BSB BSB: After a long time the master of those servants returned and settled accounts with them.
20 HGST जिस सेवक को 30, 000 दिनों की मजदूरी के बराबर धन मिला था, वह अपने स्वामी के पास 60, 000 दिनों की मजदूरी लेकर आया। उसने कहा,‘हे स्वामी, तूने मुझे 30, 000 दिनों की मजदूरी सौंपी थी। देख, मैंने इसका उपयोग 30, 000 दिनों की और मजदूरी कमाने में किया है!’ BSB BSB: The servant who had received the five talents came and presented five more. ‘Master,’ he said, ‘you entrusted me with five talents. See, I have gained five more.’
21 HGST उसके स्वामी ने उत्तर दिया,‘तू बहुत अच्छा सेवक है! तू मेरे प्रति बहुत विश्वासयोग्य रहा है। तूने थोड़े से धन का बहुत अच्छा प्रबंधन किया है, अत: मैं तुझे बहुत सी वस्तुओं का अधिकारी बना दूँगा। आकर मेरे साथ आनन्द मना!’ BSB BSB: His master replied, ‘Well done, good and faithful servant! You have been faithful with a few things; I will put you in charge of many things. Enter into the joy of your master!’
22 HGST जिस सेवक को 12, 000 दिनों की मजदूरी के बराबर धन मिला था, वह भी{ अपने स्वामी के पास} आया। उसने कहा,‘हे स्वामी, तूने मुझे 12, 000 दिनों की मजदूरी सौंपी थी। देख, मैंने इसका उपयोग 12, 000 दिनों की और मजदूरी कमाने में किया है!’ BSB BSB: The servant who had received the two talents also came and said, ‘Master, you entrusted me with two talents. See, I have gained two more.’
23 HGST उसके स्वामी ने उत्तर दिया,‘तू बहुत अच्छा सेवक है! तू मेरे प्रति बहुत विश्वासयोग्य रहा है। तूने थोड़े से धन का बहुत अच्छा प्रबंधन किया है, अत: मैं तुझे बहुत सी वस्तुओं का अधिकारी बना दूँगा। आकर मेरे साथ आनन्द मना!’ BSB BSB: His master replied, ‘Well done, good and faithful servant! You have been faithful with a few things; I will put you in charge of many things. Enter into the joy of your master!’
24 HGST तब जिस सेवक को 6, 000 दिनों की मजदूरी के बराबर धन मिला था, वह भी{ अपने स्वामी के पास} आया। उसने कहा,‘हे स्वामी, मैं समझता हूँ कि तू एक कठोर मनुष्य है।{ तू} उस किसान के समान हैं जो ऐसी फसल काटता है जो उसने नहीं बोई। BSB BSB: Finally, the servant who had received the one talent came and said, ‘Master, I knew that you are a hard man, reaping where you have not sown and gathering where you have not scattered seed.
25 HGST अत: मैं तुझ से डर गया था। मैंने जाकर तेरा धन भूमि में गाड़ दिया था। देख, तेरा धन यहाँ है!’ BSB BSB: So I was afraid and went out and hid your talent in the ground. See, you have what belongs to you.’
26 HGST उसके स्वामी ने उत्तर दिया,‘तू एक बुरा सेवक है! तू आलसी रहा है! कल्पना कर कि यह बात सच है कि मैं उस किसान के समान हूँ जो ऐसी फसल काटता है जो मैंने नहीं बोई! BSB BSB: ‘You wicked, lazy servant!’ replied his master. ‘You knew that I reap where I have not sown and gather where I have not scattered seed.
27 HGST तब तुझे कम से कम मेरा धन साहूकारों को दे देना चाहिए था! फिर जब मैं लौटता तो मुझे वह उसके कमाए हुए ब्याज के साथ वापस मिल जाता!’ BSB BSB: Then you should have deposited my money with the bankers, and on my return I would have received it back with interest.
28 HGST अत:{ उस स्वामी ने अपने अन्य सेवकों से कहा,}‘इससे 6, 000 दिनों की मजदूरी लेकर उस सेवक को दे दो जिसके पास 60, 000 दिनों की मजदूरी है! BSB BSB: Therefore take the talent from him and give it to the one who has ten talents.
29 HGST जो कोई उसका अच्छा उपयोग करता है जो उन्हें मिला है, तो मैं और भी अधिक दूँगा, और उनके पास बहुतायत से अधिक होगा। परन्तु जो लोग उसका अच्छा उपयोग नहीं करते जो उन्हें मिला है, तो मैं उनसे वह भी ले लूँगा जो उनके पास पहले से है। BSB BSB: For everyone who has will be given more, and he will have an abundance. But the one who does not have, even what he has will be taken away from him.
30 HGST इसके अलावा, इस निकम्मे सेवक को नरक में फेंक दो, जो एक बुरी जगह है जहाँ परमेश्वर कोई आत्मिक आशीषें नहीं देता। वहाँ लोग अपने दु: ख के कारण रोएँगे, और अपने दाँत पीसेंगे क्योंकि वे गम्भीर पीड़ा का अनुभव करेंगे।’ BSB BSB: And throw that worthless servant into the outer darkness, where there will be weeping and gnashing of teeth.’
32 HGST स्वर्गदूत हर जनसमूह को मेरे सामने इकट्ठा करेंगे। तब मैं उन लोगों को दो समूहों में अलग- अलग कर दूँगा, जैसे एक चरवाहा अपनी भेड़ों को अपनी बकरियों से अलग करता है। BSB BSB: All the nations will be gathered before Him, and He will separate the people one from another, as a shepherd separates the sheep from the goats.
33 HGST मैं धर्मी लोगों को अपनी दाहिनी ओर रखकर सम्मान दूँगा, परन्तु अधर्मी लोगों को मैं अपनी बाईं ओर रखूँगा,{ जैसे एक चरवाहा भेड़ों को एक ओर तथा बकरियों को दूसरी ओर रखता है}। BSB BSB: He will place the sheep on His right and the goats on His left.
34 HGST तब मैं, अर्थात् राजा, अपनी दाहिनी ओर के उन{ धर्मी लोगों} से कहूँगा,‘तुम लोग जिन्हें मेरे पिता ने आशीष दी है, आओ! और आकर उन लोगों के लाभ प्राप्त करो जिन पर मैं शासन करता हूँ। मेरे पिता ने संसार की सृष्टि के समय से ही तुम्हारे लिए ये लाभ तैयार किए हैं। BSB BSB: Then the King will say to those on His right, ‘Come, you who are blessed by My Father, inherit the kingdom prepared for you from the foundation of the world.
35 HGST { ये वस्तुएँ तुम्हारी इसलिए हैं,} क्योंकि जब मैं भूखा था तो तुम ने मुझे खिलाया। जब मैं प्यासा था तो तुम ने मुझे कुछ पीने को दिया। जब मैं तुम्हारे नगर में एक परदेशी था तो तुम ने अपने घरों में रहने के लिए मेरा स्वागत किया। BSB BSB: For I was hungry and you gave Me something to eat, I was thirsty and you gave Me something to drink, I was a stranger and you took Me in,
36 HGST जब मेरे पास कपड़े नहीं थे तो तुम ने मुझे कपड़े दिए। जब मैं बीमार था तो तुम ने मेरी देखभाल की। जब मैं बन्दीगृह में था, तब भी तुम मुझ से मिलने आए थे।’ BSB BSB: I was naked and you clothed Me, I was sick and you looked after Me, I was in prison and you visited Me.’
37 HGST तब वे धर्मी लोग उत्तर देंगे,‘हे प्रभु, तू कब भूखा था कि हमने तुझे देखा और तुझे खिलाया? तू कब प्यासा था और हमने तुझे कुछ पीने को दिया? BSB BSB: Then the righteous will answer Him, ‘Lord, when did we see You hungry and feed You, or thirsty and give You something to drink?
38 HGST तू कब{ हमारे नगर में} परदेशी था कि हमने तुझे देखा और अपने घरों में{ रहने के लिए} तेरा स्वागत किया? तेरे पास कब कपड़े नहीं थे और हमने तुझे कुछ कपड़े दिए? BSB BSB: When did we see You a stranger and take You in, or naked and clothe You?
39 HGST तू कब बीमार था या बन्दीगृह में था और हम तुझ से मिलने आए थे?’ BSB BSB: When did we see You sick or in prison and visit You?’
40 HGST तब मैं, अर्थात् राजा, उन धर्मी लोगों को उत्तर दूँगा,‘मैं तुम से सच कहता हूँ कि तुम ने इन लोगों में से सबसे छोटे से छोटे व्यक्ति के लिए जो कुछ भी किया, जो मुझे भाइयों के समान प्रिय हैं तो वह तुम ने मेरे लिए किया।’ BSB BSB: And the King will reply, ‘Truly I tell you, whatever you did for one of the least of these brothers of Mine, you did for Me.’
42 HGST { तुम वहाँ जाने के योग्य इसलिए हो,} क्योंकि जब मैं भूखा था तो तुम ने मुझे खाना नहीं खिलाया। जब मैं प्यासा था तो तुम ने मुझे कुछ पीने को नहीं दिया। BSB BSB: For I was hungry and you gave Me nothing to eat, I was thirsty and you gave Me nothing to drink,
43 HGST जब मैं तुम्हारे नगर में एक परदेशी था तो तुम ने अपने घरों में रहने के लिए मेरा स्वागत नहीं किया। जब मेरे पास कपड़े नहीं थे तो तुम ने मुझे कपड़े नहीं दिए। जब मैं बीमार था और बन्दीगृह में था, तब तुम ने मेरी देखभाल नहीं की।’ BSB BSB: I was a stranger and you did not take Me in, I was naked and you did not clothe Me, I was sick and in prison and you did not look after Me.’
44 HGST तब वे लोग जो मेरी बाईं हैं उत्तर देंगे,‘हे प्रभु, तू कब भूखा या प्यासा या परदेशी या बिना कपड़ों के या बीमार या बन्दीगृह में था, और हमने तेरी आवश्यकताएँ पूरी नहीं कीं?’ BSB BSB: And they too will reply, ‘Lord, when did we see You hungry or thirsty or a stranger or naked or sick or in prison, and did not minister to You?’
45 HGST वह उत्तर देगा,‘मैं तुम से सच कहता हूँ कि तुम ने मेरे इन लोगों में से सबसे छोटे से छोटे व्यक्ति के लिए जो कुछ भी नहीं किया, वह तुम ने मेरे लिए भी नहीं किया।’ BSB BSB: Then the King will answer, ‘Truly I tell you, whatever you did not do for one of the least of these, you did not do for Me.’